पंचांग 11 अगस्त 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 अगस्त 1985 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:15
सूर्यास्त19:04
चंद्रोदय02:05 (12 अग॰)
चंद्रास्त14:56
मास:
अधिक श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
वृषभ 02:45 (12 अग॰) तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण दशमी 17:12 तक, फिर कृष्ण एकादशी 18:18 (12 अग॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 13:46 तक, फिर मृगशीर्ष 15:34 (12 अग॰) तक
योग
व्याघात 22:55 तक, फिर हर्षण 22:40 (12 अग॰) तक
करण
विष्टि 17:12 तक, फिर बव 05:50 (12 अग॰) तक, फिर बालव 18:18 (12 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:05
  • राहु काल17:28 – 19:04
  • यमगंड12:39 – 14:15
  • गुलिक काल15:51 – 17:28

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:15 – 07:51
  • चर(सामान्य)07:51 – 09:27
  • लाभ(शुभ)09:27 – 11:03
  • अमृत(शुभ)11:03 – 12:39
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:15
  • शुभ(शुभ)14:15 – 15:51
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:51 – 17:28
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:28 – 19:04

रात

  • शुभ(शुभ)19:04 – 20:28
  • अमृत(शुभ)20:28 – 21:51
  • चर(सामान्य)21:51 – 23:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:39 (12 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:39 (12 अग॰) – 02:03 (12 अग॰)
  • लाभ(शुभ)02:03 (12 अग॰) – 03:27 (12 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (12 अग॰) – 04:51 (12 अग॰)
  • शुभ(शुभ)04:51 (12 अग॰) – 06:15 (12 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें