पंचांग 21 अगस्त 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 अगस्त 1985 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:57
चंद्रोदय10:53
चंद्रास्त22:41
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 01:19 (22 अग॰) तक, फिर शुक्ल सप्तमी 23:07 (22 अग॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 07:53 तक, फिर स्वाती 06:20 (22 अग॰) तक
योग
शुक्ल 22:04 तक, फिर ब्रह्म 19:11 (22 अग॰) तक
करण
कौलव 14:29 तक, फिर तैतिल 01:19 (22 अग॰) तक, फिर गर 12:11 (22 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:37 – 14:12
  • यमगंड07:52 – 09:27
  • गुलिक काल11:02 – 12:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:17 – 07:52
  • अमृत(शुभ)07:52 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:02
  • शुभ(शुभ)11:02 – 12:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:12
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:47
  • चर(सामान्य)15:47 – 17:22
  • लाभ(शुभ)17:22 – 18:57

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:57 – 20:22
  • शुभ(शुभ)20:22 – 21:47
  • अमृत(शुभ)21:47 – 23:12
  • चर(सामान्य)23:12 – 00:37 (22 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (22 अग॰) – 02:02 (22 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:02 (22 अग॰) – 03:27 (22 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (22 अग॰) – 04:52 (22 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:52 (22 अग॰) – 06:17 (22 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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