पंचांग 6 सितंबर 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

6 सितंबर 1985 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय23:11
चंद्रास्त11:53
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 04:40 (7 सित॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 06:42 (8 सित॰) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 19:20 तक, फिर रोहिणी 22:05 (7 सित॰) तक
योग
व्याघात 06:23 तक, फिर हर्षण 07:17 (7 सित॰) तक
करण
विष्टि 15:29 तक, फिर बव 04:40 (7 सित॰) तक, फिर बालव 17:45 (7 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:57
  • राहु काल10:59 – 12:32
  • यमगंड15:38 – 17:11
  • गुलिक काल07:53 – 09:26

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:20 – 07:53
  • लाभ(शुभ)07:53 – 09:26
  • अमृत(शुभ)09:26 – 10:59
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:32
  • शुभ(शुभ)12:32 – 14:05
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:05 – 15:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:38 – 17:11
  • चर(सामान्य)17:11 – 18:44

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:44 – 20:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:11 – 21:38
  • लाभ(शुभ)21:38 – 23:05
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:05 – 00:32 (7 सित॰)
  • शुभ(शुभ)00:32 (7 सित॰) – 01:59 (7 सित॰)
  • अमृत(शुभ)01:59 (7 सित॰) – 03:26 (7 सित॰)
  • चर(सामान्य)03:26 (7 सित॰) – 04:53 (7 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:53 (7 सित॰) – 06:20 (7 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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