पंचांग 8 सितंबर 1985

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

8 सितंबर 1985 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय00:46 (9 सित॰)
चंद्रास्त13:40
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
संवत्सर:
क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
वृषभ 11:16 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 06:42 तक, फिर कृष्ण नवमी 08:06 (9 सित॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 00:17 (9 सित॰) तक, फिर आर्द्रा 01:47 (10 सित॰) तक
योग
वज्र 07:52 तक, फिर सिद्धि 07:56 (9 सित॰) तक
करण
कौलव 06:42 तक, फिर तैतिल 19:29 तक, फिर गर 08:06 (9 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:56
  • राहु काल17:10 – 18:43
  • यमगंड12:32 – 14:04
  • गुलिक काल15:37 – 17:10

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:53
  • चर(सामान्य)07:53 – 09:26
  • लाभ(शुभ)09:26 – 10:59
  • अमृत(शुभ)10:59 – 12:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:04
  • शुभ(शुभ)14:04 – 15:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:37 – 17:10
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:10 – 18:43

रात

  • शुभ(शुभ)18:43 – 20:10
  • अमृत(शुभ)20:10 – 21:37
  • चर(सामान्य)21:37 – 23:04
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:04 – 00:32 (9 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:32 (9 सित॰) – 01:59 (9 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:59 (9 सित॰) – 03:26 (9 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:26 (9 सित॰) – 04:53 (9 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:53 (9 सित॰) – 06:21 (9 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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