पंचांग 27 दिसंबर 1985
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
27 दिसंबर 1985 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:04
सूर्यास्त18:06
चंद्रोदय18:07
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1907 · विक्रम (चैत्रादि) 2042
- संवत्सर:
- क्रोधन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल पूर्णिमा 13:00 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 14:22 (28 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 04:54 (28 दिस॰) तक, फिर पुनर्वसु 06:31 (29 दिस॰) तक
- योग
- ब्रह्म 06:22 (28 दिस॰) तक, फिर इन्द्र 06:03 (29 दिस॰) तक
- करण
- बव 13:00 तक, फिर बालव 01:44 (28 दिस॰) तक, फिर कौलव 14:22 (28 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 12:57
- राहु काल11:12 – 12:35
- यमगंड15:20 – 16:43
- गुलिक काल08:27 – 09:50
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)07:04 – 08:27
- लाभ(शुभ)08:27 – 09:50
- अमृत(शुभ)09:50 – 11:12
- काल(वर्जित (परंपरा))11:12 – 12:35
- शुभ(शुभ)12:35 – 13:58
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:58 – 15:20
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:20 – 16:43
- चर(सामान्य)16:43 – 18:06
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:06 – 19:43
- काल(वर्जित (परंपरा))19:43 – 21:21
- लाभ(शुभ)21:21 – 22:58
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:58 – 00:35 (28 दिस॰)
- शुभ(शुभ)00:35 (28 दिस॰) – 02:13 (28 दिस॰)
- अमृत(शुभ)02:13 (28 दिस॰) – 03:50 (28 दिस॰)
- चर(सामान्य)03:50 (28 दिस॰) – 05:27 (28 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:27 (28 दिस॰) – 07:05 (28 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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