पंचांग 10 जून 1986
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 जून 1986 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:10
चंद्रोदय07:56
चंद्रास्त21:42
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत)
- संवत:
- शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
- संवत्सर:
- क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- वृषभ
- चंद्र राशि:
- मिथुन 22:09 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 02:06 (11 जून) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 03:43 (12 जून) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 04:45 (11 जून) तक, फिर पुष्य 06:57 (12 जून) तक
- योग
- वृद्धि 23:40 तक, फिर ध्रुव 00:02 (12 जून) तक
- करण
- तैतिल 13:09 तक, फिर गर 02:06 (11 जून) तक, फिर वणिज 14:58 (11 जून) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 13:00
- राहु काल15:52 – 17:31
- यमगंड09:15 – 10:54
- गुलिक काल12:33 – 14:13
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:57 – 07:36
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:36 – 09:15
- चर(सामान्य)09:15 – 10:54
- लाभ(शुभ)10:54 – 12:33
- अमृत(शुभ)12:33 – 14:13
- काल(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:52
- शुभ(शुभ)15:52 – 17:31
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:31 – 19:10
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))19:10 – 20:31
- लाभ(शुभ)20:31 – 21:52
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:52 – 23:13
- शुभ(शुभ)23:13 – 00:33 (11 जून)
- अमृत(शुभ)00:33 (11 जून) – 01:54 (11 जून)
- चर(सामान्य)01:54 (11 जून) – 03:15 (11 जून)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:15 (11 जून) – 04:36 (11 जून)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:36 (11 जून) – 05:57 (11 जून)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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