पंचांग 5 नवंबर 1986

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 नवंबर 1986 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:35
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदय09:47
चंद्रास्त20:52
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1908 · विक्रम (चैत्रादि) 2043
संवत्सर:
क्षय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
वृश्चिक 11:01 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 22:56 तक, फिर शुक्ल पंचमी 20:03 (6 नव॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 11:02 तक, फिर मूल 08:44 (6 नव॰) तक
योग
अतिगण्ड 12:48 तक, फिर सुकर्मा 09:08 (6 नव॰) तक
करण
वणिज 12:29 तक, फिर विष्टि 22:56 तक, फिर बव 09:27 (6 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:18 – 13:43
  • यमगंड08:01 – 09:26
  • गुलिक काल10:52 – 12:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:35 – 08:01
  • अमृत(शुभ)08:01 – 09:26
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:52
  • शुभ(शुभ)10:52 – 12:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:09
  • चर(सामान्य)15:09 – 16:34
  • लाभ(शुभ)16:34 – 18:00

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:00 – 19:34
  • शुभ(शुभ)19:34 – 21:09
  • अमृत(शुभ)21:09 – 22:43
  • चर(सामान्य)22:43 – 00:18 (6 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:18 (6 नव॰) – 01:52 (6 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (6 नव॰) – 03:27 (6 नव॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (6 नव॰) – 05:01 (6 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:01 (6 नव॰) – 06:36 (6 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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