पंचांग 27 जून 1987

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 जून 1987 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:00
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय06:38
चंद्रास्त20:24
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1909 · विक्रम (चैत्रादि) 2044
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मिथुन 02:34 (28 जून) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 13:23 तक, फिर शुक्ल द्वितीया 15:47 (28 जून) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 06:22 तक, फिर पुनर्वसु 09:19 (28 जून) तक
योग
ध्रुव 22:49 तक, फिर व्याघात 23:49 (28 जून) तक
करण
बव 13:23 तक, फिर बालव 02:34 (28 जून) तक, फिर कौलव 15:47 (28 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:03
  • राहु काल09:18 – 10:58
  • यमगंड14:16 – 15:55
  • गुलिक काल06:00 – 07:39

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:00 – 07:39
  • शुभ(शुभ)07:39 – 09:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:18 – 10:58
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:58 – 12:37
  • चर(सामान्य)12:37 – 14:16
  • लाभ(शुभ)14:16 – 15:55
  • अमृत(शुभ)15:55 – 17:35
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:35 – 19:14

रात

  • लाभ(शुभ)19:14 – 20:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:35 – 21:56
  • शुभ(शुभ)21:56 – 23:16
  • अमृत(शुभ)23:16 – 00:37 (28 जून)
  • चर(सामान्य)00:37 (28 जून) – 01:58 (28 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:58 (28 जून) – 03:19 (28 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:19 (28 जून) – 04:39 (28 जून)
  • लाभ(शुभ)04:39 (28 जून) – 06:00 (28 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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