पंचांग 21 अक्टूबर 1987
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 अक्टूबर 1987 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय05:57 (22 अक्टू॰)
चंद्रास्त17:13
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1909 · विक्रम (चैत्रादि) 2044
- संवत्सर:
- प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 23:05 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 22:58 (22 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 01:22 (22 अक्टू॰) तक, फिर चित्रा 01:50 (23 अक्टू॰) तक
- योग
- इन्द्र 06:31 तक, फिर वैधृति 05:38 (22 अक्टू॰) तक, फिर विष्कम्भ 04:17 (23 अक्टू॰) तक
- करण
- विष्टि 10:55 तक, फिर शकुनि 23:05 तक, फिर चतुष्पद 11:06 (22 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:19 – 13:46
- यमगंड07:57 – 09:24
- गुलिक काल10:51 – 12:19
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:29 – 07:57
- अमृत(शुभ)07:57 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:51
- शुभ(शुभ)10:51 – 12:19
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:46
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:13
- चर(सामान्य)15:13 – 16:41
- लाभ(शुभ)16:41 – 18:08
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:08 – 19:41
- शुभ(शुभ)19:41 – 21:13
- अमृत(शुभ)21:13 – 22:46
- चर(सामान्य)22:46 – 00:19 (22 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:19 (22 अक्टू॰) – 01:52 (22 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (22 अक्टू॰) – 03:24 (22 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:24 (22 अक्टू॰) – 04:57 (22 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:57 (22 अक्टू॰) – 06:30 (22 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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