पंचांग 29 अक्टूबर 1987

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 अक्टूबर 1987 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:32
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय12:55
चंद्रास्त00:12 (30 अक्टू॰)
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1909 · विक्रम (चैत्रादि) 2044
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 11:44 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 09:36 (30 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 19:11 तक, फिर श्रवण 17:47 (30 अक्टू॰) तक
योग
धृति 10:53 तक, फिर शूल 07:59 (30 अक्टू॰) तक
करण
वणिज 11:44 तक, फिर विष्टि 22:40 तक, फिर बव 09:36 (30 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल13:44 – 15:10
  • यमगंड06:32 – 07:59
  • गुलिक काल09:25 – 10:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:32 – 07:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:59 – 09:25
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:51
  • चर(सामान्य)10:51 – 12:18
  • लाभ(शुभ)12:18 – 13:44
  • अमृत(शुभ)13:44 – 15:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:10 – 16:37
  • शुभ(शुभ)16:37 – 18:03

रात

  • अमृत(शुभ)18:03 – 19:37
  • चर(सामान्य)19:37 – 21:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:44
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:44 – 00:18 (30 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)00:18 (30 अक्टू॰) – 01:52 (30 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:52 (30 अक्टू॰) – 03:25 (30 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)03:25 (30 अक्टू॰) – 04:59 (30 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)04:59 (30 अक्टू॰) – 06:33 (30 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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