पंचांग 23 दिसंबर 1987

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 दिसंबर 1987 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय09:33
चंद्रास्त20:56
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1909 · विक्रम (चैत्रादि) 2044
संवत्सर:
प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 14:02 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 10:58 (24 दिस॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 08:46 तक, फिर श्रवण 06:21 (24 दिस॰) तक, फिर धनिष्ठा 04:15 (25 दिस॰) तक
योग
व्याघात 18:15 तक, फिर हर्षण 14:32 (24 दिस॰) तक
करण
गर 14:02 तक, फिर वणिज 00:28 (24 दिस॰) तक, फिर विष्टि 10:58 (24 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 12:55परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:33 – 13:55
  • यमगंड08:25 – 09:48
  • गुलिक काल11:10 – 12:33

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:02 – 08:25
  • अमृत(शुभ)08:25 – 09:48
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:48 – 11:10
  • शुभ(शुभ)11:10 – 12:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:33 – 13:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:55 – 15:18
  • चर(सामान्य)15:18 – 16:41
  • लाभ(शुभ)16:41 – 18:03

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:03 – 19:41
  • शुभ(शुभ)19:41 – 21:18
  • अमृत(शुभ)21:18 – 22:56
  • चर(सामान्य)22:56 – 00:33 (24 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:33 (24 दिस॰) – 02:10 (24 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:10 (24 दिस॰) – 03:48 (24 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)03:48 (24 दिस॰) – 05:25 (24 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:25 (24 दिस॰) – 07:03 (24 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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