पंचांग 18 मार्च 1988
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
18 मार्च 1988 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:40
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय06:42
चंद्रास्त19:08
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1909 · विक्रम (चैत्रादि) 2044
- संवत्सर:
- प्रभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 07:32 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 04:22 (19 मार्च) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 01:35 (20 मार्च) तक
- नक्षत्र
- उत्तराभाद्रपदा 04:03 (19 मार्च) तक, फिर रेवती 02:01 (20 मार्च) तक
- योग
- शुक्ल 01:43 (19 मार्च) तक, फिर ब्रह्म 22:14 (19 मार्च) तक
- करण
- नाग 07:32 तक, फिर किंस्तुघ्न 17:55 तक, फिर बव 04:22 (19 मार्च) तक, फिर बालव 14:55 (19 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:06
- राहु काल11:12 – 12:42
- यमगंड15:43 – 17:14
- गुलिक काल08:11 – 09:41
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:40 – 08:11
- लाभ(शुभ)08:11 – 09:41
- अमृत(शुभ)09:41 – 11:12
- काल(वर्जित (परंपरा))11:12 – 12:42
- शुभ(शुभ)12:42 – 14:13
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
- चर(सामान्य)17:14 – 18:45
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:45 – 20:14
- काल(वर्जित (परंपरा))20:14 – 21:43
- लाभ(शुभ)21:43 – 23:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:42 (19 मार्च)
- शुभ(शुभ)00:42 (19 मार्च) – 02:11 (19 मार्च)
- अमृत(शुभ)02:11 (19 मार्च) – 03:40 (19 मार्च)
- चर(सामान्य)03:40 (19 मार्च) – 05:10 (19 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:10 (19 मार्च) – 06:39 (19 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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