पंचांग 4 मई 1988

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 मई 1988 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:05
सूर्यास्त18:57
चंद्रोदय21:28
चंद्रास्त07:34
मास:
वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1910 · विक्रम (चैत्रादि) 2045
संवत्सर:
विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 02:59 (5 मई) तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 01:31 (6 मई) तक
नक्षत्र
अनुराधा 08:53 तक, फिर ज्येष्ठा 08:23 (5 मई) तक
योग
परिघ 19:34 तक, फिर शिव 17:24 (5 मई) तक
करण
वणिज 15:36 तक, फिर विष्टि 02:59 (5 मई) तक, फिर बव 14:17 (5 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:31 – 14:07
  • यमगंड07:42 – 09:18
  • गुलिक काल10:54 – 12:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:05 – 07:42
  • अमृत(शुभ)07:42 – 09:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:18 – 10:54
  • शुभ(शुभ)10:54 – 12:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:07
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:44
  • चर(सामान्य)15:44 – 17:20
  • लाभ(शुभ)17:20 – 18:57

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:57 – 20:20
  • शुभ(शुभ)20:20 – 21:44
  • अमृत(शुभ)21:44 – 23:07
  • चर(सामान्य)23:07 – 00:31 (5 मई)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (5 मई) – 01:54 (5 मई)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:54 (5 मई) – 03:18 (5 मई)
  • लाभ(शुभ)03:18 (5 मई) – 04:41 (5 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:41 (5 मई) – 06:05 (5 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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