पंचांग 24 अगस्त 1988

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

24 अगस्त 1988 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:18
सूर्यास्त18:55
चंद्रोदय16:29
चंद्रास्त03:41 (25 अग॰)
मास:
श्रावण (अमांत)
संवत:
शक 1910 · विक्रम (चैत्रादि) 2045
संवत्सर:
विभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
धनु 23:16 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 02:53 (25 अग॰) तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 23:42 (25 अग॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 17:46 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 15:34 (25 अग॰) तक
योग
आयुष्मान 02:15 (25 अग॰) तक, फिर सौभाग्य 22:34 (25 अग॰) तक
करण
बव 16:18 तक, फिर बालव 02:53 (25 अग॰) तक, फिर कौलव 13:21 (25 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:01परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:36 – 14:11
  • यमगंड07:52 – 09:27
  • गुलिक काल11:02 – 12:36

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:18 – 07:52
  • अमृत(शुभ)07:52 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:02
  • शुभ(शुभ)11:02 – 12:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:36 – 14:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:45
  • चर(सामान्य)15:45 – 17:20
  • लाभ(शुभ)17:20 – 18:55

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:55 – 20:20
  • शुभ(शुभ)20:20 – 21:46
  • अमृत(शुभ)21:46 – 23:11
  • चर(सामान्य)23:11 – 00:36 (25 अग॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:36 (25 अग॰) – 02:02 (25 अग॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:02 (25 अग॰) – 03:27 (25 अग॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (25 अग॰) – 04:53 (25 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (25 अग॰) – 06:18 (25 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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