पंचांग 17 सितंबर 1989

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 सितंबर 1989 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय19:54
चंद्रास्त07:59
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1911 · विक्रम (चैत्रादि) 2046
संवत्सर:
शुक्ल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मीन 18:50 तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 10:10 तक, फिर कृष्ण तृतीया 06:38 (18 सित॰) तक
नक्षत्र
रेवती 18:50 तक, फिर अश्विनी 16:11 (18 सित॰) तक
योग
वृद्धि 12:29 तक, फिर ध्रुव 08:28 (18 सित॰) तक
करण
गर 10:10 तक, फिर वणिज 20:23 तक, फिर विष्टि 06:38 (18 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53
  • राहु काल17:03 – 18:35
  • यमगंड12:28 – 14:00
  • गुलिक काल15:32 – 17:03

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:57
  • अमृत(शुभ)10:57 – 12:28
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:28 – 14:00
  • शुभ(शुभ)14:00 – 15:32
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:32 – 17:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:03 – 18:35

रात

  • शुभ(शुभ)18:35 – 20:03
  • अमृत(शुभ)20:03 – 21:32
  • चर(सामान्य)21:32 – 23:00
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:29 (18 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:29 (18 सित॰) – 01:57 (18 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:57 (18 सित॰) – 03:25 (18 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (18 सित॰) – 04:54 (18 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (18 सित॰) – 06:22 (18 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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