पंचांग 30 दिसंबर 1990

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 दिसंबर 1990 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:05
सूर्यास्त18:07
चंद्रोदय16:37
चंद्रास्त06:28 (31 दिस॰)
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1912 · विक्रम (चैत्रादि) 2047
संवत्सर:
प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृषभ 22:38 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 07:23 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 03:44 (31 दिस॰) तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 00:05 (1 जन॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 12:06 तक, फिर मृगशीर्ष 09:10 (31 दिस॰) तक
योग
शुभ 10:16 तक, फिर शुक्ल 06:01 (31 दिस॰) तक, फिर ब्रह्म 01:48 (1 जन॰) तक
करण
तैतिल 07:23 तक, फिर गर 17:34 तक, फिर वणिज 03:44 (31 दिस॰) तक, फिर विष्टि 13:54 (31 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 12:58
  • राहु काल16:45 – 18:07
  • यमगंड12:36 – 13:59
  • गुलिक काल15:22 – 16:45

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:05 – 08:28
  • चर(सामान्य)08:28 – 09:51
  • लाभ(शुभ)09:51 – 11:14
  • अमृत(शुभ)11:14 – 12:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:36 – 13:59
  • शुभ(शुभ)13:59 – 15:22
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:22 – 16:45
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:07

रात

  • शुभ(शुभ)18:07 – 19:45
  • अमृत(शुभ)19:45 – 21:22
  • चर(सामान्य)21:22 – 22:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:59 – 00:37 (31 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:37 (31 दिस॰) – 02:14 (31 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)02:14 (31 दिस॰) – 03:51 (31 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:51 (31 दिस॰) – 05:29 (31 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)05:29 (31 दिस॰) – 07:06 (31 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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