पंचांग 1 जनवरी 1991
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 जनवरी 1991 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:09
चंद्रोदय18:54
चंद्रास्त07:30
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1912 · विक्रम (चैत्रादि) 2047
- संवत्सर:
- प्रमोद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- मिथुन 22:17 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 20:37 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 17:30 (2 जन॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 03:39 (2 जन॰) तक, फिर पुष्य 01:25 (3 जन॰) तक
- योग
- इन्द्र 21:44 तक, फिर वैधृति 17:58 (2 जन॰) तक
- करण
- बालव 10:19 तक, फिर कौलव 20:37 तक, फिर तैतिल 07:00 (2 जन॰) तक, फिर गर 17:30 (2 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59
- राहु काल15:23 – 16:46
- यमगंड09:52 – 11:15
- गुलिक काल12:37 – 14:00
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:06 – 08:29
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:29 – 09:52
- चर(सामान्य)09:52 – 11:15
- लाभ(शुभ)11:15 – 12:37
- अमृत(शुभ)12:37 – 14:00
- काल(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:23
- शुभ(शुभ)15:23 – 16:46
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:46 – 18:09
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:09 – 19:46
- लाभ(शुभ)19:46 – 21:23
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:23 – 23:00
- शुभ(शुभ)23:00 – 00:38 (2 जन॰)
- अमृत(शुभ)00:38 (2 जन॰) – 02:15 (2 जन॰)
- चर(सामान्य)02:15 (2 जन॰) – 03:52 (2 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:52 (2 जन॰) – 05:29 (2 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:29 (2 जन॰) – 07:07 (2 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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