पंचांग 23 जुलाई 1991

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

23 जुलाई 1991 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:08
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय16:43
चंद्रास्त03:52 (24 जुल॰)
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1913 · विक्रम (चैत्रादि) 2048
संवत्सर:
प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
वृश्चिक 15:41 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 16:26 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 19:00 (24 जुल॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 15:41 तक, फिर मूल 18:49 (24 जुल॰) तक
योग
ब्रह्म 10:03 तक, फिर इन्द्र 11:08 (24 जुल॰) तक
करण
बालव 16:26 तक, फिर कौलव 05:43 (24 जुल॰) तक, फिर तैतिल 19:00 (24 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07
  • राहु काल15:56 – 17:34
  • यमगंड09:24 – 11:02
  • गुलिक काल12:40 – 14:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:08 – 07:46
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:46 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 11:02
  • लाभ(शुभ)11:02 – 12:40
  • अमृत(शुभ)12:40 – 14:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:56
  • शुभ(शुभ)15:56 – 17:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:34 – 19:12

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:12 – 20:34
  • लाभ(शुभ)20:34 – 21:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
  • शुभ(शुभ)23:19 – 00:41 (24 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)00:41 (24 जुल॰) – 02:03 (24 जुल॰)
  • चर(सामान्य)02:03 (24 जुल॰) – 03:25 (24 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (24 जुल॰) – 04:47 (24 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:47 (24 जुल॰) – 06:09 (24 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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