पंचांग 6 अगस्त 1991
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
6 अगस्त 1991 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:13
सूर्यास्त19:07
चंद्रोदय02:55 (7 अग॰)
चंद्रास्त15:38
- मास:
- आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1913 · विक्रम (चैत्रादि) 2048
- संवत्सर:
- प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- वृषभ 18:02 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 21:14 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 18:06 (7 अग॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 07:03 तक, फिर मृगशीर्ष 04:57 (7 अग॰) तक, फिर आर्द्रा 02:32 (8 अग॰) तक
- योग
- व्याघात 23:27 तक, फिर हर्षण 19:48 (7 अग॰) तक
- करण
- बव 10:40 तक, फिर बालव 21:14 तक, फिर कौलव 07:42 (7 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
- राहु काल15:53 – 17:30
- यमगंड09:26 – 11:03
- गुलिक काल12:40 – 14:17
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:13 – 07:50
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:50 – 09:26
- चर(सामान्य)09:26 – 11:03
- लाभ(शुभ)11:03 – 12:40
- अमृत(शुभ)12:40 – 14:17
- काल(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:53
- शुभ(शुभ)15:53 – 17:30
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:30 – 19:07
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))19:07 – 20:30
- लाभ(शुभ)20:30 – 21:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:53 – 23:17
- शुभ(शुभ)23:17 – 00:40 (7 अग॰)
- अमृत(शुभ)00:40 (7 अग॰) – 02:03 (7 अग॰)
- चर(सामान्य)02:03 (7 अग॰) – 03:27 (7 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (7 अग॰) – 04:50 (7 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:50 (7 अग॰) – 06:13 (7 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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