पंचांग 2 अक्टूबर 1991
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 अक्टूबर 1991 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:22
चंद्रोदय01:46 (3 अक्टू॰)
चंद्रास्त14:11
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1913 · विक्रम (चैत्रादि) 2048
- संवत्सर:
- प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मिथुन 09:52 तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 14:51 तक, फिर कृष्ण दशमी 12:41 (3 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु 15:31 तक, फिर पुष्य 14:05 (3 अक्टू॰) तक
- योग
- परिघ 07:38 तक, फिर शिव 04:46 (3 अक्टू॰) तक, फिर सिद्ध 01:51 (4 अक्टू॰) तक
- करण
- गर 14:51 तक, फिर वणिज 01:47 (3 अक्टू॰) तक, फिर विष्टि 12:41 (3 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:47परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:23 – 13:53
- यमगंड07:54 – 09:24
- गुलिक काल10:54 – 12:23
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:25 – 07:54
- अमृत(शुभ)07:54 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:54
- शुभ(शुभ)10:54 – 12:23
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:23 – 13:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:23
- चर(सामान्य)15:23 – 16:53
- लाभ(शुभ)16:53 – 18:22
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:22 – 19:53
- शुभ(शुभ)19:53 – 21:23
- अमृत(शुभ)21:23 – 22:53
- चर(सामान्य)22:53 – 00:24 (3 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:24 (3 अक्टू॰) – 01:54 (3 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:54 (3 अक्टू॰) – 03:24 (3 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:24 (3 अक्टू॰) – 04:55 (3 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:55 (3 अक्टू॰) – 06:25 (3 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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