पंचांग 6 अक्टूबर 1991
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
6 अक्टूबर 1991 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:19
चंद्रोदय05:40 (7 अक्टू॰)
चंद्रास्त17:05
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1913 · विक्रम (चैत्रादि) 2048
- संवत्सर:
- प्रजापति (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- सिंह 15:43 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 04:34 (7 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 03:08 (8 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 10:00 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 08:59 (7 अक्टू॰) तक
- योग
- शुक्ल 17:27 तक, फिर ब्रह्म 15:01 (7 अक्टू॰) तक
- करण
- विष्टि 17:25 तक, फिर शकुनि 04:34 (7 अक्टू॰) तक, फिर चतुष्पद 15:48 (7 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:46
- राहु काल16:50 – 18:19
- यमगंड12:22 – 13:51
- गुलिक काल15:21 – 16:50
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:25 – 07:55
- चर(सामान्य)07:55 – 09:24
- लाभ(शुभ)09:24 – 10:53
- अमृत(शुभ)10:53 – 12:22
- काल(वर्जित (परंपरा))12:22 – 13:51
- शुभ(शुभ)13:51 – 15:21
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:21 – 16:50
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:50 – 18:19
रात
- शुभ(शुभ)18:19 – 19:50
- अमृत(शुभ)19:50 – 21:21
- चर(सामान्य)21:21 – 22:52
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:52 – 00:22 (7 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:22 (7 अक्टू॰) – 01:53 (7 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)01:53 (7 अक्टू॰) – 03:24 (7 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (7 अक्टू॰) – 04:55 (7 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)04:55 (7 अक्टू॰) – 06:26 (7 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
अपनी कुंडली देखें