पंचांग 4 जनवरी 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 जनवरी 1994 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:07
सूर्यास्त18:11
चंद्रोदय00:25 (5 जन॰)
चंद्रास्त11:39
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 18:31 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 16:29 (5 जन॰) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 11:26 तक, फिर हस्त 10:05 (5 जन॰) तक
योग
शोभन 22:12 तक, फिर अतिगण्ड 19:20 (5 जन॰) तक
करण
विष्टि 07:31 तक, फिर बव 18:31 तक, फिर बालव 05:30 (5 जन॰) तक, फिर कौलव 16:29 (5 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:17 – 13:01
  • राहु काल15:25 – 16:48
  • यमगंड09:53 – 11:16
  • गुलिक काल12:39 – 14:02

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:07 – 08:30
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:30 – 09:53
  • चर(सामान्य)09:53 – 11:16
  • लाभ(शुभ)11:16 – 12:39
  • अमृत(शुभ)12:39 – 14:02
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:02 – 15:25
  • शुभ(शुभ)15:25 – 16:48
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:48 – 18:11

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:11 – 19:48
  • लाभ(शुभ)19:48 – 21:25
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:25 – 23:02
  • शुभ(शुभ)23:02 – 00:39 (5 जन॰)
  • अमृत(शुभ)00:39 (5 जन॰) – 02:16 (5 जन॰)
  • चर(सामान्य)02:16 (5 जन॰) – 03:53 (5 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:53 (5 जन॰) – 05:30 (5 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:30 (5 जन॰) – 07:08 (5 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

अपनी कुंडली देखें