पंचांग 30 मार्च 1994
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 मार्च 1994 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय22:01
चंद्रास्त08:36
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1915 · विक्रम (चैत्रादि) 2050
- संवत्सर:
- श्रीमुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- तुला 19:58 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्थी 02:47 (31 मार्च) तक, फिर कृष्ण पंचमी 00:12 (1 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 01:26 (31 मार्च) तक, फिर अनुराधा 23:35 (31 मार्च) तक
- योग
- वज्र 02:18 (31 मार्च) तक, फिर सिद्धि 23:02 (31 मार्च) तक
- करण
- बव 16:15 तक, फिर बालव 02:47 (31 मार्च) तक, फिर कौलव 13:25 (31 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:39 – 14:11
- यमगंड08:02 – 09:35
- गुलिक काल11:07 – 12:39
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:30 – 08:02
- अमृत(शुभ)08:02 – 09:35
- काल(वर्जित (परंपरा))09:35 – 11:07
- शुभ(शुभ)11:07 – 12:39
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:11
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:15
- लाभ(शुभ)17:15 – 18:47
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:47 – 20:15
- शुभ(शुभ)20:15 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:11
- चर(सामान्य)23:11 – 00:38 (31 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (31 मार्च) – 02:06 (31 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:06 (31 मार्च) – 03:34 (31 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:34 (31 मार्च) – 05:02 (31 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:02 (31 मार्च) – 06:30 (31 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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