पंचांग 25 अप्रैल 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 अप्रैल 1994 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:11
सूर्यास्त18:54
चंद्रोदय18:33
चंद्रास्तनहीं
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
कन्या 07:00 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 01:15 (26 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 21:29 (26 अप्रैल) तक
नक्षत्र
चित्रा 17:30 तक, फिर स्वाती 14:31 (26 अप्रैल) तक
योग
वज्र 20:33 तक, फिर सिद्धि 16:18 (26 अप्रैल) तक
करण
विष्टि 15:09 तक, फिर बव 01:15 (26 अप्रैल) तक, फिर बालव 11:21 (26 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:58
  • राहु काल07:46 – 09:21
  • यमगंड10:57 – 12:32
  • गुलिक काल14:08 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:11 – 07:46
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:46 – 09:21
  • शुभ(शुभ)09:21 – 10:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:57 – 12:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:08
  • चर(सामान्य)14:08 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:18
  • अमृत(शुभ)17:18 – 18:54

रात

  • चर(सामान्य)18:54 – 20:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:18 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:07
  • लाभ(शुभ)23:07 – 00:32 (26 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:32 (26 अप्रैल) – 01:56 (26 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)01:56 (26 अप्रैल) – 03:21 (26 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)03:21 (26 अप्रैल) – 04:46 (26 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)04:46 (26 अप्रैल) – 06:10 (26 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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