पंचांग 3 नवंबर 1994

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 नवंबर 1994 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:35
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त17:53
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 19:05 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 15:22 (4 नव॰) तक
नक्षत्र
स्वाती 23:38 तक, फिर विशाखा 20:42 (4 नव॰) तक
योग
प्रीति 07:51 तक, फिर आयुष्मान 03:38 (4 नव॰) तक, फिर सौभाग्य 23:23 (4 नव॰) तक
करण
चतुष्पद 08:55 तक, फिर नाग 19:05 तक, फिर किंस्तुघ्न 05:14 (4 नव॰) तक, फिर बव 15:22 (4 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40
  • राहु काल13:43 – 15:09
  • यमगंड06:35 – 08:00
  • गुलिक काल09:26 – 10:52

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:35 – 08:00
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:00 – 09:26
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:52
  • चर(सामान्य)10:52 – 12:18
  • लाभ(शुभ)12:18 – 13:43
  • अमृत(शुभ)13:43 – 15:09
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:09 – 16:35
  • शुभ(शुभ)16:35 – 18:01

रात

  • अमृत(शुभ)18:01 – 19:35
  • चर(सामान्य)19:35 – 21:09
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:09 – 22:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:18 (4 नव॰)
  • लाभ(शुभ)00:18 (4 नव॰) – 01:52 (4 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:52 (4 नव॰) – 03:26 (4 नव॰)
  • शुभ(शुभ)03:26 (4 नव॰) – 05:01 (4 नव॰)
  • अमृत(शुभ)05:01 (4 नव॰) – 06:35 (4 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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