पंचांग 20 जनवरी 1995

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 जनवरी 1995 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय21:34
चंद्रास्त09:18
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 02:30 (21 जन॰) तक, फिर कृष्ण पंचमी 01:45 (22 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 06:19 (21 जन॰) तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 06:08 (22 जन॰) तक
योग
सौभाग्य 13:28 तक, फिर शोभन 11:48 (21 जन॰) तक
करण
बव 14:45 तक, फिर बालव 02:30 (21 जन॰) तक, फिर कौलव 14:09 (21 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:07
  • राहु काल11:21 – 12:45
  • यमगंड15:33 – 16:57
  • गुलिक काल08:33 – 09:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:09 – 08:33
  • लाभ(शुभ)08:33 – 09:57
  • अमृत(शुभ)09:57 – 11:21
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:21 – 12:45
  • शुभ(शुभ)12:45 – 14:09
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:33 – 16:57
  • चर(सामान्य)16:57 – 18:21

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:21 – 19:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:57 – 21:33
  • लाभ(शुभ)21:33 – 23:09
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:09 – 00:45 (21 जन॰)
  • शुभ(शुभ)00:45 (21 जन॰) – 02:21 (21 जन॰)
  • अमृत(शुभ)02:21 (21 जन॰) – 03:57 (21 जन॰)
  • चर(सामान्य)03:57 (21 जन॰) – 05:33 (21 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:33 (21 जन॰) – 07:09 (21 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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