पंचांग 28 फ़रवरी 1995

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

28 फ़रवरी 1995 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:54
सूर्यास्त18:39
चंद्रोदय06:27 (1 मार्च)
चंद्रास्त17:42
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1916 · विक्रम (चैत्रादि) 2051
संवत्सर:
भाव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
मकर 11:51 तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 18:17 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 17:17 (1 मार्च) तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 23:34 तक, फिर शतभिषा 23:21 (1 मार्च) तक
योग
परिघ 08:29 तक, फिर शिव 06:20 (1 मार्च) तक, फिर सिद्ध 04:35 (2 मार्च) तक
करण
विष्टि 06:57 तक, फिर शकुनि 18:17 तक, फिर चतुष्पद 05:44 (1 मार्च) तक, फिर नाग 17:17 (1 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10
  • राहु काल15:43 – 17:11
  • यमगंड09:51 – 11:19
  • गुलिक काल12:47 – 14:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:54 – 08:22
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:22 – 09:51
  • चर(सामान्य)09:51 – 11:19
  • लाभ(शुभ)11:19 – 12:47
  • अमृत(शुभ)12:47 – 14:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:11 – 18:39

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:39 – 20:11
  • लाभ(शुभ)20:11 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:15
  • शुभ(शुभ)23:15 – 00:47 (1 मार्च)
  • अमृत(शुभ)00:47 (1 मार्च) – 02:18 (1 मार्च)
  • चर(सामान्य)02:18 (1 मार्च) – 03:50 (1 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:50 (1 मार्च) – 05:22 (1 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:22 (1 मार्च) – 06:54 (1 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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