पंचांग 26 सितंबर 1995

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 सितंबर 1995 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:27
चंद्रोदय07:42
चंद्रास्त19:40
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1917 · विक्रम (चैत्रादि) 2052
संवत्सर:
युवा (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कन्या 14:07 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 19:41 तक, फिर शुक्ल तृतीया 17:52 (27 सित॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 01:38 (27 सित॰) तक, फिर स्वाती 00:29 (28 सित॰) तक
योग
इन्द्र 02:30 (27 सित॰) तक, फिर वैधृति 23:50 (27 सित॰) तक
करण
बालव 08:30 तक, फिर कौलव 19:41 तक, फिर तैतिल 06:48 (27 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:50
  • राहु काल15:26 – 16:57
  • यमगंड09:24 – 10:55
  • गुलिक काल12:25 – 13:56

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:55
  • लाभ(शुभ)10:55 – 12:25
  • अमृत(शुभ)12:25 – 13:56
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:56 – 15:26
  • शुभ(शुभ)15:26 – 16:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:57 – 18:27

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:27 – 19:57
  • लाभ(शुभ)19:57 – 21:26
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:26 – 22:56
  • शुभ(शुभ)22:56 – 00:26 (27 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:26 (27 सित॰) – 01:55 (27 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:55 (27 सित॰) – 03:25 (27 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (27 सित॰) – 04:54 (27 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (27 सित॰) – 06:24 (27 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22

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