पंचांग 13 नवंबर 1996

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 नवंबर 1996 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:40
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय08:31
चंद्रास्त20:06
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1918 · विक्रम (चैत्रादि) 2053
संवत्सर:
धाता (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
वृश्चिक 21:45 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 04:36 (14 नव॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 02:23 (15 नव॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 21:45 तक, फिर मूल 20:17 (14 नव॰) तक
योग
अतिगण्ड 09:26 तक, फिर सुकर्मा 06:34 (14 नव॰) तक, फिर धृति 03:34 (15 नव॰) तक
करण
तैतिल 17:39 तक, फिर गर 04:36 (14 नव॰) तक, फिर वणिज 15:30 (14 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:41परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:18 – 13:43
  • यमगंड08:04 – 09:29
  • गुलिक काल10:54 – 12:18

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:40 – 08:04
  • अमृत(शुभ)08:04 – 09:29
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:29 – 10:54
  • शुभ(शुभ)10:54 – 12:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:08
  • चर(सामान्य)15:08 – 16:32
  • लाभ(शुभ)16:32 – 17:57

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:57 – 19:32
  • शुभ(शुभ)19:32 – 21:08
  • अमृत(शुभ)21:08 – 22:43
  • चर(सामान्य)22:43 – 00:19 (14 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:19 (14 नव॰) – 01:54 (14 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:54 (14 नव॰) – 03:29 (14 नव॰)
  • लाभ(शुभ)03:29 (14 नव॰) – 05:05 (14 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:05 (14 नव॰) – 06:40 (14 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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