पंचांग 31 दिसंबर 1996

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 दिसंबर 1996 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय23:35
चंद्रास्त11:18
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1918 · विक्रम (चैत्रादि) 2053
संवत्सर:
धाता (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
सिंह 19:36 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 16:00 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 18:18 (1 जन॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 12:52 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 15:39 (1 जन॰) तक
योग
आयुष्मान 07:44 तक, फिर सौभाग्य 08:29 (1 जन॰) तक
करण
वणिज 16:00 तक, फिर विष्टि 05:12 (1 जन॰) तक, फिर बव 18:18 (1 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59
  • राहु काल15:23 – 16:46
  • यमगंड09:52 – 11:14
  • गुलिक काल12:37 – 14:00

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:06 – 08:29
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:29 – 09:52
  • चर(सामान्य)09:52 – 11:14
  • लाभ(शुभ)11:14 – 12:37
  • अमृत(शुभ)12:37 – 14:00
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:23
  • शुभ(शुभ)15:23 – 16:46
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:46 – 18:08

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:08 – 19:46
  • लाभ(शुभ)19:46 – 21:23
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:23 – 23:00
  • शुभ(शुभ)23:00 – 00:37 (1 जन॰)
  • अमृत(शुभ)00:37 (1 जन॰) – 02:15 (1 जन॰)
  • चर(सामान्य)02:15 (1 जन॰) – 03:52 (1 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:52 (1 जन॰) – 05:29 (1 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:29 (1 जन॰) – 07:06 (1 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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