पंचांग 15 दिसंबर 2000

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 दिसंबर 2000 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:58
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदय22:21
चंद्रास्त10:42
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1922 · विक्रम (चैत्रादि) 2057
संवत्सर:
विक्रम (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
कर्क 22:45 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 23:04 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 20:45 (16 दिस॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 22:45 तक, फिर मघा 21:07 (16 दिस॰) तक
योग
वैधृति 22:28 तक, फिर विष्कम्भ 19:20 (16 दिस॰) तक
करण
कौलव 12:23 तक, फिर तैतिल 23:04 तक, फिर गर 09:51 (16 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:51
  • राहु काल11:07 – 12:29
  • यमगंड15:15 – 16:37
  • गुलिक काल08:21 – 09:44

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:58 – 08:21
  • लाभ(शुभ)08:21 – 09:44
  • अमृत(शुभ)09:44 – 11:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:07 – 12:29
  • शुभ(शुभ)12:29 – 13:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:52 – 15:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:15 – 16:37
  • चर(सामान्य)16:37 – 18:00

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:00 – 19:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:37 – 21:15
  • लाभ(शुभ)21:15 – 22:52
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:52 – 00:30 (16 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)00:30 (16 दिस॰) – 02:07 (16 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)02:07 (16 दिस॰) – 03:44 (16 दिस॰)
  • चर(सामान्य)03:44 (16 दिस॰) – 05:22 (16 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:22 (16 दिस॰) – 06:59 (16 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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