पंचांग 11 जुलाई 2001

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 जुलाई 2001 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:04
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय23:20
चंद्रास्त10:38
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1923 · विक्रम (चैत्रादि) 2058
संवत्सर:
वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
कुंभ 17:49 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 07:44 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 09:52 (12 जुल॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 00:30 (12 जुल॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 03:00 (13 जुल॰) तक
योग
सौभाग्य 14:00 तक, फिर शोभन 14:42 (12 जुल॰) तक
करण
तैतिल 07:44 तक, फिर गर 20:51 तक, फिर वणिज 09:52 (12 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:39 – 14:18
  • यमगंड07:43 – 09:22
  • गुलिक काल11:01 – 12:39

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:04 – 07:43
  • अमृत(शुभ)07:43 – 09:22
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:22 – 11:01
  • शुभ(शुभ)11:01 – 12:39
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
  • चर(सामान्य)15:57 – 17:36
  • लाभ(शुभ)17:36 – 19:15

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
  • शुभ(शुभ)20:36 – 21:57
  • अमृत(शुभ)21:57 – 23:18
  • चर(सामान्य)23:18 – 00:40 (12 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (12 जुल॰) – 02:01 (12 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:01 (12 जुल॰) – 03:22 (12 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)03:22 (12 जुल॰) – 04:43 (12 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:43 (12 जुल॰) – 06:05 (12 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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