पंचांग 3 अक्टूबर 2001

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 अक्टूबर 2001 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय19:06
चंद्रास्त06:52
मास:
अधिक आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1923 · विक्रम (चैत्रादि) 2058
संवत्सर:
वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मीन 23:37 तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 20:54 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 22:10 (4 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
रेवती 23:37 तक, फिर अश्विनी 01:25 (5 अक्टू॰) तक
योग
ध्रुव 11:28 तक, फिर व्याघात 11:31 (4 अक्टू॰) तक
करण
बालव 08:09 तक, फिर कौलव 20:54 तक, फिर तैतिल 09:35 (4 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:23 – 13:53
  • यमगंड07:54 – 09:24
  • गुलिक काल10:53 – 12:23

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:25 – 07:54
  • अमृत(शुभ)07:54 – 09:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
  • शुभ(शुभ)10:53 – 12:23
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:23 – 13:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:22
  • चर(सामान्य)15:22 – 16:52
  • लाभ(शुभ)16:52 – 18:21

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:21 – 19:52
  • शुभ(शुभ)19:52 – 21:22
  • अमृत(शुभ)21:22 – 22:53
  • चर(सामान्य)22:53 – 00:23 (4 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:23 (4 अक्टू॰) – 01:54 (4 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:54 (4 अक्टू॰) – 03:24 (4 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)03:24 (4 अक्टू॰) – 04:55 (4 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:55 (4 अक्टू॰) – 06:25 (4 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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