पंचांग 14 दिसंबर 2001
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 दिसंबर 2001 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:58
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त17:38
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1923 · विक्रम (चैत्रादि) 2058
- संवत्सर:
- वृष (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 04:01 (15 दिस॰) तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 02:17 (15 दिस॰) तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 02:22 (16 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 04:01 (15 दिस॰) तक, फिर मूल 04:43 (16 दिस॰) तक
- योग
- धृति 06:59 तक, फिर शूल 05:30 (15 दिस॰) तक, फिर गण्ड 04:25 (16 दिस॰) तक
- करण
- चतुष्पद 14:26 तक, फिर नाग 02:17 (15 दिस॰) तक, फिर किंस्तुघ्न 14:16 (15 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:51
- राहु काल11:06 – 12:29
- यमगंड15:14 – 16:37
- गुलिक काल08:20 – 09:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:58 – 08:20
- लाभ(शुभ)08:20 – 09:43
- अमृत(शुभ)09:43 – 11:06
- काल(वर्जित (परंपरा))11:06 – 12:29
- शुभ(शुभ)12:29 – 13:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:51 – 15:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:14 – 16:37
- चर(सामान्य)16:37 – 18:00
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:00 – 19:37
- काल(वर्जित (परंपरा))19:37 – 21:14
- लाभ(शुभ)21:14 – 22:52
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:52 – 00:29 (15 दिस॰)
- शुभ(शुभ)00:29 (15 दिस॰) – 02:06 (15 दिस॰)
- अमृत(शुभ)02:06 (15 दिस॰) – 03:44 (15 दिस॰)
- चर(सामान्य)03:44 (15 दिस॰) – 05:21 (15 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:21 (15 दिस॰) – 06:58 (15 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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