पंचांग 25 जून 2002

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

25 जून 2002 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय19:52
चंद्रास्त06:07
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1924 · विक्रम (चैत्रादि) 2059
संवत्सर:
चित्रभानु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 02:30 (26 जून) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 02:21 (27 जून) तक
नक्षत्र
मूल 10:25 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 10:37 (26 जून) तक
योग
ब्रह्म 03:59 (26 जून) तक, फिर इन्द्र 02:53 (27 जून) तक
करण
बालव 14:47 तक, फिर कौलव 02:30 (26 जून) तक, फिर तैतिल 14:21 (26 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:03
  • राहु काल15:55 – 17:34
  • यमगंड09:18 – 10:57
  • गुलिक काल12:37 – 14:16

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:59 – 07:39
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:39 – 09:18
  • चर(सामान्य)09:18 – 10:57
  • लाभ(शुभ)10:57 – 12:37
  • अमृत(शुभ)12:37 – 14:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:55
  • शुभ(शुभ)15:55 – 17:34
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:34 – 19:14

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:35
  • लाभ(शुभ)20:35 – 21:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:55 – 23:16
  • शुभ(शुभ)23:16 – 00:37 (26 जून)
  • अमृत(शुभ)00:37 (26 जून) – 01:57 (26 जून)
  • चर(सामान्य)01:57 (26 जून) – 03:18 (26 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:18 (26 जून) – 04:39 (26 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:39 (26 जून) – 06:00 (26 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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