पंचांग 3 मार्च 2013
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 मार्च 2013 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:52
सूर्यास्त18:41
चंद्रोदय00:00 (4 मार्च)
चंद्रास्त10:37
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
- संवत्सर:
- नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- तुला 16:28 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण षष्ठी 18:17 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 16:22 (4 मार्च) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 22:11 तक, फिर अनुराधा 20:57 (4 मार्च) तक
- योग
- व्याघात 23:26 तक, फिर हर्षण 20:41 (4 मार्च) तक
- करण
- गर 07:12 तक, फिर वणिज 18:17 तक, फिर विष्टि 05:20 (4 मार्च) तक, फिर बव 16:22 (4 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:10
- राहु काल17:12 – 18:41
- यमगंड12:46 – 14:15
- गुलिक काल15:43 – 17:12
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:52 – 08:20
- चर(सामान्य)08:20 – 09:49
- लाभ(शुभ)09:49 – 11:17
- अमृत(शुभ)11:17 – 12:46
- काल(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:15
- शुभ(शुभ)14:15 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:12
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:12 – 18:41
रात
- शुभ(शुभ)18:41 – 20:12
- अमृत(शुभ)20:12 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:46 (4 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:46 (4 मार्च) – 02:17 (4 मार्च)
- लाभ(शुभ)02:17 (4 मार्च) – 03:48 (4 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:48 (4 मार्च) – 05:20 (4 मार्च)
- शुभ(शुभ)05:20 (4 मार्च) – 06:51 (4 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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