पंचांग 31 मार्च 2013
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
31 मार्च 2013 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय22:54
चंद्रास्त09:26
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1934 · विक्रम (चैत्रादि) 2069
- संवत्सर:
- नंदन (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण पंचमी 03:43 (1 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण षष्ठी 01:22 (2 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- अनुराधा 02:39 (1 अप्रैल) तक, फिर ज्येष्ठा 01:02 (2 अप्रैल) तक
- योग
- सिद्धि 01:43 (1 अप्रैल) तक, फिर व्यतीपात 22:40 (1 अप्रैल) तक
- करण
- कौलव 16:56 तक, फिर तैतिल 03:43 (1 अप्रैल) तक, फिर गर 14:32 (1 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03
- राहु काल17:15 – 18:47
- यमगंड12:38 – 14:11
- गुलिक काल15:43 – 17:15
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:29 – 08:01
- चर(सामान्य)08:01 – 09:34
- लाभ(शुभ)09:34 – 11:06
- अमृत(शुभ)11:06 – 12:38
- काल(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:11
- शुभ(शुभ)14:11 – 15:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:47
रात
- शुभ(शुभ)18:47 – 20:15
- अमृत(शुभ)20:15 – 21:43
- चर(सामान्य)21:43 – 23:10
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:10 – 00:38 (1 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:38 (1 अप्रैल) – 02:06 (1 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)02:06 (1 अप्रैल) – 03:33 (1 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:33 (1 अप्रैल) – 05:01 (1 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)05:01 (1 अप्रैल) – 06:28 (1 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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