पंचांग 26 जून 2013

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 जून 2013 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:00
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय21:53
चंद्रास्त08:53
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
संवत्सर:
विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मकर 04:03 (27 जून) तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 03:01 (27 जून) तक, फिर कृष्ण पंचमी 00:43 (28 जून) तक
नक्षत्र
श्रवण 17:02 तक, फिर धनिष्ठा 15:14 (27 जून) तक
योग
वैधृति 10:25 तक, फिर विष्कम्भ 07:03 (27 जून) तक
करण
बव 16:25 तक, फिर बालव 03:01 (27 जून) तक, फिर कौलव 13:46 (27 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:03परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:37 – 14:16
  • यमगंड07:39 – 09:18
  • गुलिक काल10:58 – 12:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:00 – 07:39
  • अमृत(शुभ)07:39 – 09:18
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:18 – 10:58
  • शुभ(शुभ)10:58 – 12:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:16 – 15:55
  • चर(सामान्य)15:55 – 17:35
  • लाभ(शुभ)17:35 – 19:14

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:35
  • शुभ(शुभ)20:35 – 21:56
  • अमृत(शुभ)21:56 – 23:16
  • चर(सामान्य)23:16 – 00:37 (27 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (27 जून) – 01:58 (27 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:58 (27 जून) – 03:18 (27 जून)
  • लाभ(शुभ)03:18 (27 जून) – 04:39 (27 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:39 (27 जून) – 06:00 (27 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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