पंचांग 22 जुलाई 2013

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

22 जुलाई 2013 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:08
सूर्यास्त19:13
चंद्रोदय18:47
चंद्रास्तनहीं
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
संवत्सर:
विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
धनु 14:12 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 23:45 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 20:08 (23 जुल॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 08:56 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 06:02 (23 जुल॰) तक, फिर श्रवण 03:20 (24 जुल॰) तक
योग
विष्कम्भ 01:37 (23 जुल॰) तक, फिर प्रीति 21:35 (23 जुल॰) तक
करण
विष्टि 13:38 तक, फिर बव 23:45 तक, फिर बालव 09:55 (23 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:07
  • राहु काल07:46 – 09:24
  • यमगंड11:02 – 12:40
  • गुलिक काल14:18 – 15:56

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:08 – 07:46
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:46 – 09:24
  • शुभ(शुभ)09:24 – 11:02
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:02 – 12:40
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:18
  • चर(सामान्य)14:18 – 15:56
  • लाभ(शुभ)15:56 – 17:35
  • अमृत(शुभ)17:35 – 19:13

रात

  • चर(सामान्य)19:13 – 20:35
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:35 – 21:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:57 – 23:19
  • लाभ(शुभ)23:19 – 00:41 (23 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:41 (23 जुल॰) – 02:03 (23 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)02:03 (23 जुल॰) – 03:25 (23 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)03:25 (23 जुल॰) – 04:47 (23 जुल॰)
  • चर(सामान्य)04:47 (23 जुल॰) – 06:09 (23 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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