पंचांग 14 अगस्त 2013
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 अगस्त 2013 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:15
सूर्यास्त19:02
चंद्रोदय12:36
चंद्रास्त00:12 (15 अग॰)
- मास:
- श्रावण (अमांत)
- संवत:
- शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
- संवत्सर:
- विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- तुला 20:18 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल अष्टमी 03:35 (15 अग॰) तक, फिर शुक्ल नवमी 01:32 (16 अग॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 02:04 (15 अग॰) तक, फिर अनुराधा 00:49 (16 अग॰) तक
- योग
- शुक्ल 07:23 तक, फिर ब्रह्म 05:02 (15 अग॰) तक, फिर इन्द्र 02:17 (16 अग॰) तक
- करण
- विष्टि 16:26 तक, फिर बव 03:35 (15 अग॰) तक, फिर बालव 14:37 (15 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:39 – 14:14
- यमगंड07:51 – 09:27
- गुलिक काल11:03 – 12:39
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:15 – 07:51
- अमृत(शुभ)07:51 – 09:27
- काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
- शुभ(शुभ)11:03 – 12:39
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:50
- चर(सामान्य)15:50 – 17:26
- लाभ(शुभ)17:26 – 19:02
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:02 – 20:26
- शुभ(शुभ)20:26 – 21:50
- अमृत(शुभ)21:50 – 23:14
- चर(सामान्य)23:14 – 00:39 (15 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:39 (15 अग॰) – 02:03 (15 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (15 अग॰) – 03:27 (15 अग॰)
- लाभ(शुभ)03:27 (15 अग॰) – 04:51 (15 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:51 (15 अग॰) – 06:16 (15 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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