पंचांग 15 सितंबर 2013

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 सितंबर 2013 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:36
चंद्रोदय15:17
चंद्रास्त03:01 (16 सित॰)
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
संवत्सर:
विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
धनु 07:42 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 02:09 (16 सित॰) तक, फिर शुक्ल द्वादशी 23:31 (16 सित॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 00:19 (16 सित॰) तक, फिर श्रवण 22:26 (16 सित॰) तक
योग
शोभन 20:37 तक, फिर अतिगण्ड 17:21 (16 सित॰) तक
करण
वणिज 15:28 तक, फिर विष्टि 02:09 (16 सित॰) तक, फिर बव 12:50 (16 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:54
  • राहु काल17:05 – 18:36
  • यमगंड12:29 – 14:01
  • गुलिक काल15:33 – 17:05

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:57
  • अमृत(शुभ)10:57 – 12:29
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:29 – 14:01
  • शुभ(शुभ)14:01 – 15:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:33 – 17:05
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:05 – 18:36

रात

  • शुभ(शुभ)18:36 – 20:05
  • अमृत(शुभ)20:05 – 21:33
  • चर(सामान्य)21:33 – 23:01
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:01 – 00:29 (16 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:29 (16 सित॰) – 01:57 (16 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:57 (16 सित॰) – 03:26 (16 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:26 (16 सित॰) – 04:54 (16 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (16 सित॰) – 06:22 (16 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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