पंचांग 17 दिसंबर 2013

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 दिसंबर 2013 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:01
चंद्रोदय18:10
चंद्रास्तनहीं
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1935 · विक्रम (चैत्रादि) 2070
संवत्सर:
विजय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृषभ 11:52 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल पूर्णिमा 14:58 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 17:18 (18 दिस॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 01:13 (18 दिस॰) तक, फिर आर्द्रा 04:03 (19 दिस॰) तक
योग
शुभ 21:33 तक, फिर शुक्ल 22:15 (18 दिस॰) तक
करण
बव 14:58 तक, फिर बालव 04:06 (18 दिस॰) तक, फिर कौलव 17:18 (18 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:52
  • राहु काल15:15 – 16:38
  • यमगंड09:45 – 11:07
  • गुलिक काल12:30 – 13:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:59 – 08:22
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:22 – 09:45
  • चर(सामान्य)09:45 – 11:07
  • लाभ(शुभ)11:07 – 12:30
  • अमृत(शुभ)12:30 – 13:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:15
  • शुभ(शुभ)15:15 – 16:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:38 – 18:01

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:01 – 19:38
  • लाभ(शुभ)19:38 – 21:16
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:16 – 22:53
  • शुभ(शुभ)22:53 – 00:30 (18 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)00:30 (18 दिस॰) – 02:08 (18 दिस॰)
  • चर(सामान्य)02:08 (18 दिस॰) – 03:45 (18 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:45 (18 दिस॰) – 05:23 (18 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:23 (18 दिस॰) – 07:00 (18 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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