पंचांग 1 अक्टूबर 2014
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 अक्टूबर 2014 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:23
चंद्रोदय12:26
चंद्रास्त00:00 (2 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1936 · विक्रम (चैत्रादि) 2071
- संवत्सर:
- जय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल सप्तमी 13:49 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 12:08 (2 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- मूल 23:03 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 21:53 (2 अक्टू॰) तक
- योग
- सौभाग्य 15:55 तक, फिर शोभन 13:24 (2 अक्टू॰) तक
- करण
- वणिज 13:49 तक, फिर विष्टि 01:02 (2 अक्टू॰) तक, फिर बव 12:08 (2 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:24 – 13:53
- यमगंड07:54 – 09:24
- गुलिक काल10:54 – 12:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:25 – 07:54
- अमृत(शुभ)07:54 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:54
- शुभ(शुभ)10:54 – 12:24
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:53 – 15:23
- चर(सामान्य)15:23 – 16:53
- लाभ(शुभ)16:53 – 18:23
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:23 – 19:53
- शुभ(शुभ)19:53 – 21:23
- अमृत(शुभ)21:23 – 22:54
- चर(सामान्य)22:54 – 00:24 (2 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:24 (2 अक्टू॰) – 01:54 (2 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:54 (2 अक्टू॰) – 03:24 (2 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:24 (2 अक्टू॰) – 04:54 (2 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (2 अक्टू॰) – 06:25 (2 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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