पंचांग 15 अक्टूबर 2014
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 अक्टूबर 2014 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:28
सूर्यास्त18:12
चंद्रोदय00:07 (16 अक्टू॰)
चंद्रास्त12:30
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1936 · विक्रम (चैत्रादि) 2071
- संवत्सर:
- जय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मिथुन 04:06 (16 अक्टू॰) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 11:45 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 13:45 (16 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 08:18 तक, फिर पुनर्वसु 10:46 (16 अक्टू॰) तक
- योग
- शिव 00:52 (16 अक्टू॰) तक, फिर सिद्ध 01:32 (17 अक्टू॰) तक
- करण
- बव 11:45 तक, फिर बालव 00:42 (16 अक्टू॰) तक, फिर कौलव 13:45 (16 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:43परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:20 – 13:48
- यमगंड07:56 – 09:24
- गुलिक काल10:52 – 12:20
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:28 – 07:56
- अमृत(शुभ)07:56 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:52
- शुभ(शुभ)10:52 – 12:20
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:20 – 13:48
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:48 – 15:16
- चर(सामान्य)15:16 – 16:44
- लाभ(शुभ)16:44 – 18:12
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:12 – 19:44
- शुभ(शुभ)19:44 – 21:16
- अमृत(शुभ)21:16 – 22:48
- चर(सामान्य)22:48 – 00:20 (16 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:20 (16 अक्टू॰) – 01:52 (16 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (16 अक्टू॰) – 03:24 (16 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:24 (16 अक्टू॰) – 04:56 (16 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:56 (16 अक्टू॰) – 06:28 (16 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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