पंचांग 19 नवंबर 2014
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
19 नवंबर 2014 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:43
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय04:32 (20 नव॰)
चंद्रास्त15:43
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1936 · विक्रम (चैत्रादि) 2071
- संवत्सर:
- जय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- कन्या 23:47 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 18:07 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 18:45 (20 नव॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 11:01 तक, फिर चित्रा 12:23 (20 नव॰) तक
- योग
- प्रीति 12:06 तक, फिर आयुष्मान 11:34 (20 नव॰) तक
- करण
- तैतिल 18:07 तक, फिर गर 06:31 (20 नव॰) तक, फिर वणिज 18:45 (20 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:42परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:19 – 13:43
- यमगंड08:07 – 09:31
- गुलिक काल10:55 – 12:19
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:43 – 08:07
- अमृत(शुभ)08:07 – 09:31
- काल(वर्जित (परंपरा))09:31 – 10:55
- शुभ(शुभ)10:55 – 12:19
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:08
- चर(सामान्य)15:08 – 16:32
- लाभ(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
- शुभ(शुभ)19:32 – 21:08
- अमृत(शुभ)21:08 – 22:44
- चर(सामान्य)22:44 – 00:20 (20 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:20 (20 नव॰) – 01:55 (20 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:55 (20 नव॰) – 03:31 (20 नव॰)
- लाभ(शुभ)03:31 (20 नव॰) – 05:07 (20 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:07 (20 नव॰) – 06:43 (20 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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