पंचांग 24 मार्च 2015
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
24 मार्च 2015 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:35
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय09:42
चंद्रास्त22:53
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1937 · विक्रम (चैत्रादि) 2072
- संवत्सर:
- मन्मथ (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मेष 08:35 तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल पंचमी 01:39 (25 मार्च) तक, फिर शुक्ल षष्ठी 00:53 (26 मार्च) तक
- नक्षत्र
- कृत्तिका 02:01 (25 मार्च) तक, फिर रोहिणी 01:56 (26 मार्च) तक
- योग
- विष्कम्भ 15:26 तक, फिर प्रीति 13:23 (25 मार्च) तक
- करण
- बव 14:20 तक, फिर बालव 01:39 (25 मार्च) तक, फिर कौलव 13:10 (25 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:05
- राहु काल15:43 – 17:15
- यमगंड09:38 – 11:09
- गुलिक काल12:41 – 14:12
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:35 – 08:07
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:07 – 09:38
- चर(सामान्य)09:38 – 11:09
- लाभ(शुभ)11:09 – 12:41
- अमृत(शुभ)12:41 – 14:12
- काल(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:43
- शुभ(शुभ)15:43 – 17:15
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:46
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:46 – 20:14
- लाभ(शुभ)20:14 – 21:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:12
- शुभ(शुभ)23:12 – 00:40 (25 मार्च)
- अमृत(शुभ)00:40 (25 मार्च) – 02:09 (25 मार्च)
- चर(सामान्य)02:09 (25 मार्च) – 03:37 (25 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:37 (25 मार्च) – 05:06 (25 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:06 (25 मार्च) – 06:35 (25 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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