पंचांग 27 मार्च 2015

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 मार्च 2015 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय12:16
चंद्रास्त01:32 (28 मार्च)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1937 · विक्रम (चैत्रादि) 2072
संवत्सर:
मन्मथ (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 01:41 (28 मार्च) तक, फिर शुक्ल नवमी 03:09 (29 मार्च) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 04:04 (28 मार्च) तक, फिर पुनर्वसु 06:09 (29 मार्च) तक
योग
सौभाग्य 11:08 तक, फिर शोभन 10:54 (28 मार्च) तक
करण
विष्टि 13:12 तक, फिर बव 01:41 (28 मार्च) तक, फिर बालव 14:21 (28 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:04
  • राहु काल11:08 – 12:40
  • यमगंड15:43 – 17:15
  • गुलिक काल08:05 – 09:36

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:33 – 08:05
  • लाभ(शुभ)08:05 – 09:36
  • अमृत(शुभ)09:36 – 11:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:08 – 12:40
  • शुभ(शुभ)12:40 – 14:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
  • चर(सामान्य)17:15 – 18:47

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:47 – 20:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
  • लाभ(शुभ)21:43 – 23:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:11 – 00:39 (28 मार्च)
  • शुभ(शुभ)00:39 (28 मार्च) – 02:07 (28 मार्च)
  • अमृत(शुभ)02:07 (28 मार्च) – 03:36 (28 मार्च)
  • चर(सामान्य)03:36 (28 मार्च) – 05:04 (28 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:04 (28 मार्च) – 06:32 (28 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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