पंचांग 25 सितंबर 2015
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
25 सितंबर 2015 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:28
चंद्रोदय16:16
चंद्रास्त04:16 (26 सित॰)
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1937 · विक्रम (चैत्रादि) 2072
- संवत्सर:
- मन्मथ (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मकर 15:36 तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल द्वादशी 19:00 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 15:43 (26 सित॰) तक
- नक्षत्र
- धनिष्ठा 02:25 (26 सित॰) तक, फिर शतभिषा 23:47 (26 सित॰) तक
- योग
- सुकर्मा 08:30 तक, फिर धृति 04:51 (26 सित॰) तक, फिर शूल 00:53 (27 सित॰) तक
- करण
- बव 08:29 तक, फिर बालव 19:00 तक, फिर कौलव 05:24 (26 सित॰) तक, फिर तैतिल 15:43 (26 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:50
- राहु काल10:55 – 12:26
- यमगंड15:27 – 16:58
- गुलिक काल07:54 – 09:25
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:23 – 07:54
- लाभ(शुभ)07:54 – 09:25
- अमृत(शुभ)09:25 – 10:55
- काल(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:26
- शुभ(शुभ)12:26 – 13:56
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:56 – 15:27
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:27 – 16:58
- चर(सामान्य)16:58 – 18:28
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:28 – 19:58
- काल(वर्जित (परंपरा))19:58 – 21:27
- लाभ(शुभ)21:27 – 22:56
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:56 – 00:26 (26 सित॰)
- शुभ(शुभ)00:26 (26 सित॰) – 01:55 (26 सित॰)
- अमृत(शुभ)01:55 (26 सित॰) – 03:25 (26 सित॰)
- चर(सामान्य)03:25 (26 सित॰) – 04:54 (26 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (26 सित॰) – 06:24 (26 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
अपनी कुंडली देखें