पंचांग 28 सितंबर 2015
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 सितंबर 2015 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:26
चंद्रोदय18:45
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1937 · विक्रम (चैत्रादि) 2072
- संवत्सर:
- मन्मथ (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल पूर्णिमा 08:20 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 04:34 (29 सित॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 00:59 (30 सित॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 17:54 तक, फिर रेवती 15:00 (29 सित॰) तक
- योग
- वृद्धि 16:26 तक, फिर ध्रुव 12:14 (29 सित॰) तक
- करण
- बव 08:20 तक, फिर बालव 18:26 तक, फिर कौलव 04:34 (29 सित॰) तक, फिर तैतिल 14:45 (29 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:49
- राहु काल07:54 – 09:24
- यमगंड10:55 – 12:25
- गुलिक काल13:55 – 15:25
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:24 – 07:54
- काल(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
- शुभ(शुभ)09:24 – 10:55
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:25
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:25 – 13:55
- चर(सामान्य)13:55 – 15:25
- लाभ(शुभ)15:25 – 16:55
- अमृत(शुभ)16:55 – 18:26
रात
- चर(सामान्य)18:26 – 19:55
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:55 – 21:25
- काल(वर्जित (परंपरा))21:25 – 22:55
- लाभ(शुभ)22:55 – 00:25 (29 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:25 (29 सित॰) – 01:55 (29 सित॰)
- शुभ(शुभ)01:55 (29 सित॰) – 03:24 (29 सित॰)
- अमृत(शुभ)03:24 (29 सित॰) – 04:54 (29 सित॰)
- चर(सामान्य)04:54 (29 सित॰) – 06:24 (29 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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