पंचांग 8 जनवरी 2016
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
8 जनवरी 2016 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:08
सूर्यास्त18:13
चंद्रोदय06:10 (9 जन॰)
चंद्रास्त16:49
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
- संवत्सर:
- दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 09:47 तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 08:14 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 07:54 (9 जन॰) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 09:47 तक, फिर मूल 10:00 (9 जन॰) तक
- योग
- वृद्धि 15:39 तक, फिर ध्रुव 14:02 (9 जन॰) तक
- करण
- वणिज 08:14 तक, फिर विष्टि 20:08 तक, फिर शकुनि 07:54 (9 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:03
- राहु काल11:17 – 12:40
- यमगंड15:27 – 16:50
- गुलिक काल08:31 – 09:54
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)07:08 – 08:31
- लाभ(शुभ)08:31 – 09:54
- अमृत(शुभ)09:54 – 11:17
- काल(वर्जित (परंपरा))11:17 – 12:40
- शुभ(शुभ)12:40 – 14:04
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:04 – 15:27
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:27 – 16:50
- चर(सामान्य)16:50 – 18:13
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:13 – 19:50
- काल(वर्जित (परंपरा))19:50 – 21:27
- लाभ(शुभ)21:27 – 23:04
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:04 – 00:41 (9 जन॰)
- शुभ(शुभ)00:41 (9 जन॰) – 02:18 (9 जन॰)
- अमृत(शुभ)02:18 (9 जन॰) – 03:54 (9 जन॰)
- चर(सामान्य)03:54 (9 जन॰) – 05:31 (9 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:31 (9 जन॰) – 07:08 (9 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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